अररिया, फरवरी 21 -- फारबिसगंज, एक सवांददाता। मुकद्दस रमजान महीने के पहले जुमा के दिन शुक्रवार को शहर सहित ग्रामीण इलाकों की मस्जिदें अकीदतमंदों से भर गई। मस्जिदों में तकरीर में उलेमाओं ने कहा कि माह-ए-रमजान के 30 रोजे सिर्फ भूख और प्यास को संभालने का नाम नहीं है, बल्कि तमाम बुराईयों और गलत बातों से खुद को बचाए रखने का संदेश भी देते है। शहर के अधिकांश मस्जिदों में एक बजे से दो बजे के बीच जुमे की नमाज़ अदा की गई। तकरीर में उलेमा ने कहा की रमजान का मतलब एक ऐसा महीना,जिसमे इंसान अपने नफ़्स यानी सोच को पाक करें। इंसान जिन चीजों के पीछे भागता है,उनके पीछे भागना छोड़ सके। सीधी जुबान में खुद पर कंट्रोल रखना सीखें। हमारी तमाम इंद्रियों पर हमारी लगाम हो। इससे बड़ी बात की इंसान सीख सके कि उनसे किसी का दिल नहीं दुखाना है। रूहानियत को संवारना ही रोजे का ...