नई दिल्ली, अगस्त 21 -- विजय गोयल ,पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व छात्र नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में 'दिमागी नक्सल' का जो शब्द इस्तेमाल किया, उसने देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। भारत में नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रहा है। यह लगभग छह दशकों तक आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास के आगे एक गंभीर चुनौती बना रहा। जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में बंदूक उठाए नक्सलियों ने हजारों निर्दोष नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों और सुरक्षाकर्मियों की जान ली, इसलिए जब प्रधानमंत्री ने लाल किले से 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्द का इस्तेमाल किया, तो इसे केवल एक राजनीतिक जुमला मानकर खारिज कर देना शायद उस बड़े संदेश को न समझना होगा, जो इसके पीछे है। प्रधानमंत्री का मूल संदेश यह था कि बंदूकधारी नक्सलवाद के विरुद्ध द...