मोतिहारी, जून 8 -- सिकरहना। ईश्वर हमेशा अवस्था परिवर्तन का संकेत देते हैं । हम सभी के जीवन में सावधानी की जरूरत है। महाराजा दशरथ ने जब दर्पण में कान के समीप पके हुए बाल को देखा तो वह सावधान हो गए। खुद के हृदय का दर्पण हम सभी के जीवन के सच को बता देता है। उक्त बातें ढाका में श्रीरामचरितमानस महायज्ञ में श्रीरामकथा वाचन करते हुए सन्त चन्द्रेश जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि जहां राम होते हैं वहां काम नहीं होता और जहां जीवन की कामनाएं प्रभावी होती हैं वहां राम नहीं रहते। राम को युवराज बनाने का निश्चित करने वाले महाराज दशरथ कैकयी के समक्ष अपनी कामनाओं की संतुष्टि के लिए पहुंचे जिसके परिणाम स्वरूप उनकी अपनी इच्छा भंग हो गई। यह भी पढ़ें- श्रीराम कथा के तीसरे दिन बासुकीनाथ में रामचरित्र सुनने उमड़े श्रद्धालु उन्होंने कहा कि मोह रूपी रात्रि में ...