नई दिल्ली, जनवरी 1 -- जर्मनी में एक समय था जब चर्च की घंटियां गांवों और शहरों की धड़कन होती थीं। प्रार्थना की पुकार, उत्सवों की गूंज और सामुदायिक जीवन का केंद्र। लेकिन आज तेजी से बदलते समाज में आस्था कमजोर पड़ रही है। सदस्यों की संख्या घटने से सैकड़ों कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट चर्च बंद हो चुके हैं। जहां कभी भजन गूंजते थे, वहां अब सन्नाटा है... या फिर नया जीवन शुरू हो रहा है। ये इमारतें अब अपार्टमेंट, साइकिल दुकानें, जिम, होटल या किताबों की दुकानें बन रही हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा। इसके पीछे की वजह क्या है? दरअसल, नए साल के आगमन से कुछ दिन पहले, जर्मनी-नीदरलैंड सीमा के पास बैड बेंटहाइम के गिल्डेहॉस इलाके में स्थित छोटे कैथोलिक सेंट आना चर्च में लगभग पूरी तरह भीड़ थी। गायक मंडली गा रही थी और छोटा ऑर्गन उनका साथ दे रहा था। ...