अलीगढ़, जून 27 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। सड़क पर गुजरती गाड़ियों का शोर, मंदिर की घंटियां, अजान की आवाज, बच्चों की खिलखिलाहट या सुबह की पहली किरण... ये सब हमारे लिए सामान्य हैं, लेकिन हजारों लोगों की दुनिया इन एहसासों से कोसों दूर है। वे न दुनिया को पूरी तरह देख पाते हैं और न सुन पाते हैं। अलीगढ़ में ऐसी खामोश दुनिया लगातार बढ़ी होती जा रही है। सरकारी पंजीकरण, स्वास्थ्य शिविरों के रुझानों और विशेषज्ञों के आकलन बताते हैं कि पिछले एक दशक में दृष्टि व श्रवण दिव्यांगता के मामले तेजी से बढ़े हैं। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ बेहतर पहचान का परिणाम है, या वास्तव में एक नया सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट आकार ले रहा है? अलीगढ़ में वर्तमान में दृष्टिहीन और मूक-बधिर व्यक्तियों की संख्या 22 हजार से अधिक मानी जा रही है। इनमें करीब 13,500 दृष्टिबाधित व लगभग...