खरना का प्रसाद ग्रहण कर छठ व्रतधारी ने रखी 36 घंटे का निर्जला व्रत
जहानाबाद, मार्च 23 -- किंजर, निज संवाददाता। सनातन धर्मावलम्बियों का सबसे पवित्र एवं आस्था भरी अनुष्ठान छठ व्रत है, जिसमें खास कर बिहार की सभ्यता और संस्कृति झलकती है। इस व्रत का शुभारंभ बिहार से की गई थी जो अब अंतर प्रांतीय हो गई है। यह चार दिवसीय अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है, यह चार दिवसीय व्रत साल में दो बार रखा जाता है जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी एवं चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से लेकर षष्ठी तिथि तक रखी जाती है। चैत्र माह के छठ व्रत प्रारंभ है, चार दिवसीय अनुष्ठान के दूसरे दिन छठ व्रतधारीयो ने आसपास के जलाशय एवं नदी मे स्नान कर, पीतल के बर्तन में माथे पर जल लेकर पूरे आस्था के साथ खरना का प्रसाद श्रद्धालुओं ने पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर जलावन के रूप में आम की लकड़ी, गुड़ गाय का दूध अरवा चावल गेहूं की घी लपटी हुई ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.