पाकुड़, अप्रैल 23 -- प्रखंड मुख्यालय के मुख्य बाजार में स्थित पुराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह विशाल सरकारी ढांचा देख-रेख के अभाव में असामाजिक तत्वों और आवारा पशुओं की शरणस्थली बन चुका है। जब से स्वास्थ्य केंद्र को फतेहपुर स्थानांतरित किया गया है, तब से प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को लावारिस छोड़ दिया है। कोयला कंपनियों के प्रदूषण के बीच स्वास्थ्य संकटप्रखंड में दो-दो कोयला कंपनियां दिन-रात उत्खनन का कार्य कर रही हैं। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही और उड़ती धूल के गुबार से बाजार क्षेत्र की बड़ी आबादी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही है। विडंबना यह है कि बाजार के बीचों-बीच अस्पताल का अपना भवन उपलब्ध होने के बावजूद, स्थानीय जनता को प्राथमिक उपचार के लिए पांच किलोमीटर दूर ...
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