मेरठ, फरवरी 17 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के नौवें दिन सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा की मांगलिक क्रियाएं मंत्रोच्चारण पूर्वक की गई। भगवान की शांतिधारा सुमित जैन, जितेंद्र वोहरा, स्वर्ण कलश से अभिषेक नमन जैन व दीप प्रज्जवलन रुचि जैन, संभव जैन ने किया। नौवें दिन विधान में 121 परिवारों ने भाग लेकर पुण्य संचित किया। विधान के मध्य मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि पापों के नाश करने वाले भक्तामर स्तोत्र की महिमा तो अपरंपार है। इसके स्मरण से ही संसारी प्राणियों के पापों का नाश हो जाता है और मानव पवित्र हो जाता है। कहा कि क्षमा प्रदान करना कोई एहसास नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक साधन है। रात्रि में भगवान की महाआरती का दीप प्रज्जवलन गुरुकुल के छात्रों द्वारा किया और भगव...