देवघर, सितम्बर 27 -- देवघर,प्रतिनिधि। जैन मंदिर में आयोजित दशलक्षण महापर्व का समापन रविवार को क्षमा वाणी के साथ हुआ। जिसका प्रथम अभिषेक व विश्व शांति के लिए शांतिधारा जयप्रकाश जैन व दिव्य प्रकाश जैन ने किया। मौके पर पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने बताया कि जैन धर्म में दशलक्षण पर्यूषण पर्व का प्रारंभ उत्तम क्षमा से होता है तथा समापन क्षमा वाणी से होता है। इस प्रकार पूरे पर्यूषण पर्व के दौरान क्षमा शब्द दो बार आता है। आखिर उत्तम क्षमा और क्षमा वाणी में अंतर क्या है। दरअसल उत्तम क्षमा में हमें क्षमा करनी होती है और क्षमा वाणी में क्षमा मांगनी होती है। यह भी पढ़ें- Chitrakoot News: भगवान का पूजन-अभिषेक और शांतिधारा के साथ एक-दूसरे से मांगी क्षमा वस्तुत: उत्तम क्षमा के दिन हमारी सामर्थ होने पर भी सामने वाले के दुर्वचन और दुर्व्यवहार को सहते हुए मन मे...