लखनऊ, मार्च 23 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता स्वतंत्रता पाने की आम व्यक्ति की चाह और छटपटाहट को अनेक क्रांतिकारियों ने कैसे शब्दों और गीतों में ढालकर आवाज बुलंद कर एक आंदोलन सा खड़ा कर दिया। इसका अहसास कराती संगीतमय प्रस्तुति शहीदों ने लौ जलायी जो दर्शकों में जोश भर गयी। अमर शहीद भगत सिंह के बलिदान दिवस पर डा.उर्मिल कुमार थपलियाल फाउण्डेशन की ओर से रितुन थपलियाल के निर्देशन में नाटिका का मंचन संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में किया गया।नाटक दरअसल मेरी जां न रहे मेरा सर न रहे, जल्दी बन्द करो जलसे को डायर यूं बोला चिल्लाय, झण्डा ऊंचा रहे हमारा, जो शाने पर बगावत का आलम लेकर निकलते हैं और शीर्षक गीत शहीदों ने लौ जलायी जो जैसे क्रांतिकारी गीतों का एक कोलाज है। प्रस्तुति में जंगे आजादी के उन तरानों को शामिल किया गया है जिन पर ब्रिटिश शासन ने प्र...