नई दिल्ली, जून 10 -- टीसीए रंगाचारी,पूर्व राजनयिक पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) इन दिनों फिर से आंदोलन की आग में जल रहा है। मुद्दे बेशक पुराने हैं, लेकिन हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि सड़कों पर फौज का कब्जा है। वहां सूचनाओं की आवाजाही प्रतिबंधित है, इसलिए खबरें किसी दावे या सूत्र के हवाले से ही बाहर आ रही हैं। ऐसी ही एक खबर में कहा गया है कि एक जनाजे पर जुटी भीड़ पर फौज ने गोलीबारी कर 26 से अधिक लोगों को मार दिया है। पीओके में अवाम इस्लामाबाद की हुकूमत से नाराज रही है और यह नाराजगी 1947 से है। दरअसल, भारत ने जम्मू-कश्मीर में वास्तविक लोकतंत्र लागू किया। 1990 के दौर को अपवाद मान लें, तो यहां राज्य सरकार चाहे जिस किसी पार्टी की रही हो, उसे स्थानीय कश्मीरी नेता ही चलाते रहे हैं। राज्य स्तर के जितने भी मुद्दे रहे, उनका फैसला श्रीनगर में ही होत...