नई दिल्ली, फरवरी 24 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूछा कि क्या चुनावों में नोटा विकल्प के प्रावधान से 'चुने हुए नेताओं की गुणवत्ता' में सुधार हुआ है? अदालत ने आगे कहा कि इससे एक सीट भी नहीं भरी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि यह प्रावधान मतदाताओं को अकेले उम्मीदवार होने की स्थिति में नोटा का विकल्प चुनने से रोकता है। याचिका में मांग की गई थी कि एकल उम्मीदवार वाले चुनावों सहित सभी चुनावों में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का विकल्प अनिवार्य किया जाए। नोटा को 2013 में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में ऐतिहासिक फैसले में दिए गए निर्देश के मद्देनज...