मुरादाबाद, अप्रैल 12 -- प्रदेश की सियासत में 'सपा का गढ़' कहे जाने वाले मुरादाबाद में क्या इस बार कुछ बड़ा होने वाला है.... क्या कुंदरकी उपचुनाव की जीत ने भाजपा को वो चाबी दे दी है, जिससे वह जिले की बाकी सीटों के ताले भी खोल देगी। ये सवाल आज मुरादाबाद की गलियों से लेकर लखनऊ के गलियारों तक कौंध रहे हैं। भाजपा अब केवल दावों पर नहीं, एक ठोस रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा के गठन को 46 साल बीत चुके हैं, लेकिन मुरादाबाद जिला पार्टी के लिए आज भी एक ऐसी चुनौती बना हुआ है जिसे 'राम लहर' के अलावा कभी पूरी तरह पार नहीं किया जा सका। अब पार्टी 'कुंदरकी फॉर्मूले' को जिले की अन्य सीटों पर लागू करने की तैयारी में है। इसमें सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों (लाभार्थी कार्ड) और 'गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी' जैसी बड़ी सौगातों को विधानसभा वार भुनाने की रणनीति शामि...
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