नई दिल्ली, जनवरी 11 -- मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर मनाया जाता है। इस दिन गुड़, तिल, रेवड़ी और खिचड़ी का प्रसाद बनाकर सूर्य देव की उपासना की जाती है। लेकिन एक बहुत प्रचलित मान्यता है कि हर 72 साल बाद मकर संक्रांति की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो जाती है। लोग कहते हैं कि पहले यह 13-14 जनवरी को होती थी, अब 14-15 पर है और भविष्य में 15-16 पर आ जाएगी। क्या यह बात पूरी तरह सही है? ज्योतिष गणित और खगोल विज्ञान के आधार पर देखें तो यह बदलाव सूर्य की गति और पृथ्वी की अक्षीय घूर्णन (Precession of Equinoxes) के कारण होता है। आइए विस्तार से समझते हैं इसकी सच्चाई।मकर संक्रांति की तारीख बदलने का रहस्य मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर तय होती है। सूर्य एक वर्ष में 12 राशियों का चक्कर पूरा करत...
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