नई दिल्ली, अगस्त 3 -- हर्ष वी पंत,प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज लंदन ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है। संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते को जल्द पूरा करने की शर्त रखकर वाशिंगटन ने एक बार फिर 'दबाव डालकर बातचीत' वाली नीति ही अपनाई है। राष्ट्रपति ट्रंप की मानें, तो समझौते के मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, इसलिए अगर कूटनीति से ही अमेरिकी हित सध सकते हैं, तो सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी समझौते के लिए होर्मुज जलमार्ग को तुरंत खोलना और ईरान को अपनी परमाणु मंशा पूरी तरह से छोड़नी होगी। उन्होंने जोर देकर यह भी कहा है कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिकी सेना ...