नई दिल्ली, जून 30 -- आत्मा की सोचने की शक्ति को मन कहते हैं। उन विचारों को बुद्धि द्वारा आत्मा समझती है। जब वे विचार कर्म-व्यवहार में आते हैं, तो वे कर्म आत्मा पर अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं, जिसे संस्कार कहते हैं। मन में ही विचार करने की क्षमता है, इच्छा शक्ति है, कल्पना करने की शक्ति है, महसूस करने की क्षमता है। जब इन क्षमताओं को मनुष्य समझ नहीं पाया, तो वह उसके अधीन हो गया। जब लोगों का मन वश में नहीं हुआ, तो कह दिया कि मन बहुत दुष्ट है, पापी है, नीच है, लेकिन मन का एक दूसरा पहलू भी है कि मन बहुत सुंदर है। मन की क्षमता को अगर समझा जाए, अगर उसकी वास्तविकता को जानकर उसे यथार्थ दिशा में लगा दिया जाए, तो यह मन बड़ी-से-बड़ी लौकिक और अलौकिक उपलब्धि प्राप्त कर सकता है। इस संदर्भ में मुझे एक कहानी याद आ रही है : एक राजा था। वह बहुत अशांत और परेशा...