लखनऊ, जनवरी 22 -- लखनऊ, संवाददाता। लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से गुरुवार को दादी नानी की कहानी का आयोजन दुबग्गा लालाबाग के पीएचसी भूहर द्वितीय में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बच्चों ने प्रेरक कहानी से यह सीख ली कि किसी से तुलना में नहीं, बल्कि संतोष में खुशी मिलती है। कार्यक्रम में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने रोचक कथा से बच्चों को जीवन के अहम संदेश दिए। जीतेश ने कहानी सुनाई कि एक कौवा अपने काले रंग से असंतुष्ट होकर सबसे खुश पक्षी की खोज में निकलता है। हंस, तोता और मोर से होते हुए उसकी यात्रा चिड़ियाघर तक पहुंचती है जहां मोर बताता है कि उसकी सुंदरता ही उसके बंधन का कारण बन गई है। अंततः यह स्पष्ट होता है कि वास्तव में सबसे खुश वही है जो स्वतंत्र है, वह कौवा स्वयं है। बच्चों को यह समझाया गया कि जो हमारे पास है, उसमें संतोष करना ही सच्ची ...
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