नई दिल्ली, जून 17 -- यह कहानी बिहार के बेगूसराय जिले के पखतौल गांव की है। यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उस जिजीविषा की है जो आपदा को भी अवसर में बदल देती है। यह कहानी है निर्मला देवी की, जिन्होंने जलजमाव की समस्या से घिरी अपनी बंजर सी दिखने वाली जमीन को समृद्धि के एक नए केंद्र में बदल दिया। बिहार का चौर क्षेत्र (कम ऊंचाई वाले इलाके) हर साल मॉनसून के दौरान पानी में डूब जाता है। बेगूसराय के किसानों के लिए यह जलजमाव किसी अभिशाप से कम नहीं था। महीनों तक खेत पानी में डूबे रहने के कारण खेती पूरी तरह से अनिश्चित और आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन चुकी थी। निर्मला देवी के पास कुल 1.5 एकड़ जमीन थी, लेकिन हर साल मॉनसून आते ही उसकी 1 एकड़ जमीन पूरी तरह जलमग्न हो जाती थी। इस वजह से वह समय पर बुवाई नहीं कर पाती थीं। सालभर की कड़ी मेहनत के बाद व...