नई दिल्ली, जून 18 -- कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को विपक्ष के नेता की नियुक्ति मामले में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर दूसरे दिन भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि विधानसभा अध्यक्ष बहुमत साबित करने के लिए बुलाए बिना चैंबर में बैठकर कैसे तय कर सकते थे कौन सा बहुमत सही है और कौन सा गलत? टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने एक रिट याचिका दायर की थी। याचिका में उनके नाम को खारिज करने और पार्टी के दूसरे विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त करने को चुनौती दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष के वकील बिल्वदल भट्टाचार्य की दलील पर जस्टिस कृष्ण राव ने टिप्पणी की कि जब विधानसभा अध्यक्ष को ऐसे दो प्रस्ताव मिले थे, तो वे सदन को बहुमत साबित करने के लिए बुलाए बिना अपने चैंबर में बैठकर खुद कैसे तय कर सकते थे कि कौन सा सही है और कौन सा गलत। य...