चतरा, जून 13 -- टंडवा निज प्रतिनिधि एनटीपीसी और सीसीएल के कोयले की डिस्पैच से कोल ट्रांसपोर्टर तो मालामाल हो रहे हैं । पर किसी की हो मौत हो या फिर घर उजड़े या नि:शक्त हो जाये इससे कोल ट्रांसपोर्टिग कंपनियों को कोई मतलब नहीं है। जाम स्थल पर आक्रोशित परिजनों का है कि किसी की मौत पर गरीब परिवार आंसू बहाये या फिर मुआवजा के लिए प्रशासन की ओर घंटों उम्मीदे लगाये। अजीब दुविधा है। अचानक किसी की आंगन में मौत हो तो ट्रांसपोर्टिग कंपनियों के एजेंट इंतजार करते हैं कि कितना घंटा लाश के साथ परिजन इंतजार कर सकते है। चतरा जिले में पिछले एक साल में 150 की मौतें हुई। मुआवजा के लिए कभी शव के साथ 48 घंटे तो कभी 72 घंटे सड़कों पर पीड़ित परिवार जमे रहे। धनगडा में छह लाख मुआवजा तय होने के बाद ट्रांसपोर्टरो द्वारा समय से मुआवजा न देने पर जाम बरकरार रहना चिंता की स...