नई दिल्ली, जनवरी 15 -- सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम तीन वर्ष के वकालत पेशा मानदंड पर सभी उच्च न्यायालयों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और अन्य विधि विद्यालयों से राय मांगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ गुरुवार को भूमिका ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) की श्रेणी से संबंधित विधि स्नातकों को न्यूनतम तीन वर्ष की वकालत करने की आवश्यकता से छूट देने का अनुरोध किया गया था। मुख्य दलील यह थी कि दिव्यांग विधि स्नातकों को वकीलों द्वारा नौकरी पर नहीं रखा जाता है और इसलिए उनके लिए तीन साल के वकालत पेशे के मानदंड में ढील दी जानी चाहिए। पीठ ने हालांकि कहा कि ऐसा कोई भी पात्रता मानदंड...