मऊ, जनवरी 8 -- मऊ, संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने बीते सात नवंबर को अपने फैसले में कहा था कुत्ता काटने का ही नहीं सार्वजनिक सुरक्षा बड़ा सवाल है। न्यायाल की सख्त टिप्प्णी के बाद भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की सड़कों, स्कूलों, वार्डों, सार्वजिनक स्थलों के साथ सरकारी दफ्तरों में कुत्तों की धमाचौकड़ी देखी जा सकती है। उन्हें पकड़ने और पकड़ कर शहर से दूर छोड़ने का आदेश पीछे छूट गया है। इससे आये दिन लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। जिले में हर महीने औसतन पांच से छह हजार लोगों को कुत्ते काटते हैं। हालांकि आवारा पशुओं को रखने को नगर पालिका, नगर पंचायतों और ब्लाकों में पशु आश्रय स्थल, गोशाला आदि बनाया गया है। जहां पशुओं को पकड़ कर रखा जाता है। इसके बाद भी बहुत से छुट्टा पशु सड़कों पर बैठे रहते है, जिससे हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है। जिले...