नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- सबरीमाला मंदिर में रजस्वला महिलाओं की एंट्री पर रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने एक बार फिर से परंपराओं का हवाला दिया। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल नटराज ने कहा कि हर मंदिर और हर संप्रदाय की अलग मान्यता होती है। इसको संवैधानिक या कानूनी दायरे में अथवा महिला एवं पुरुष के अधिकार के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से अधिकार की बात की जाए तो कई मंदिर ऐसे हैं, जहां सिर्फ वेजिटेरियन खाना ही मिलता है। वहां कोई नॉनवेज ना खा सकता है और ना ले जा सकता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई कहे कि मैं तो नॉनवेज लेकर जाना चाहता हूं तो मंदिर उसे रोकेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर की परंपरा में नॉनवेज ले जाना सही नहीं माना जाता। अब वह शख्स संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार तो कह सकता है कि...