संभल, मई 3 -- कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने सिरसी की पारंपरिक मोजेक कला से जुड़े मजदूरों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। क्षेत्र के करीब 1500 से अधिक श्रमिक इस काम पर निर्भर हैं। जिनके सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। मोजेक कला में कांच के छोटे-छोटे टुकड़ों को लकड़ी, लोहे और पीतल पर सजाकर आकर्षक डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। जिनकी विदेशों में अच्छी मांग रहती है। स्थानीय स्तर पर मजदूर इन उत्पादों की फिनिशिंग कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। मोजेक कारोबारी फिरोज हैदर जैदी ने कहा कि फिरोजाबाद से आने वाले बर्तनों पर यहां काम होता है, लेकिन गैस महंगी होने से वहां उत्पादन करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है। यह भी पढ़ें- होटल-ढाबों पर महंगा हुआ खाना, प्रवासी मजदूरों का बिगड़ा बजट इससे कच्चे माल की कमी और लागत में बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण ...