धनबाद, मई 18 -- कॉमर्शियल डीजल की किल्लत और कीमत बढ़ने से कोल कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है। कीमत ज्यादा होने के कारण करार से अतिरिक्त डीजल की कीमत की भरपाई कोल कंपनियों को आउटसोर्सिंग कंपनियों को करनी पड़ रही है। इससे कोयला उत्पादन पर भी असर पड़ने लगा है। आधिकारिक सूत्रों से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार करार दर से कॉमर्शियल डीजल काफी महंगा हो गया है। वहीं जरूरत भर डीजल तेल कंपनियां आउटसोर्सिंग कंपनियों को नहीं दे रही हैं। इससे मशीनों की उपयोग क्षमता घटकर 50-60 प्रतिशत तक आ गई है। यानी डीजल की किल्लत के कारण कोयला उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग पर असर है। कई आउटसोर्सिंग कंपनियों के संचालकों ने कहा कि स्थानीय पंप से आउटसोर्सिंग कंपनियों को डीजल नहीं मिल रहा है। सीधे तेल कंपनियों से लेना पड़ रहा है। देवप्रभा के एलबी सिंह कहते हैं कि जरूरत 5...