लखीमपुरखीरी, अप्रैल 1 -- जिले में गैस एजेंसियों पर अब पहले जैसी लंबी लाइनें तो नहीं लग रहीं, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी ने होटल और ढाबा संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। सिलेंडर न मिलने के कारण कई संचालकों को मजबूरी में कोयला, डीजल और लकड़ी की भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं कुछ ढाबा संचालकों ने तो अस्थायी रूप से अपने प्रतिष्ठान बंद तक कर दिए हैं। ढाबा मालिकों का कहना है कि गैस के बिना संचालन करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि वैकल्पिक ईंधन बेहद महंगे हो चुके हैं। पहले जो कोयला करीब 1100 रुपये प्रति कुंतल मिलता था, वही अब बढ़कर 2000 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। इसी तरह लकड़ी की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई है। इस बढ़ती लागत का असर सीधे ग्राहकों पर भी पड़ा है। ढाबों और होटलों में खाने-पीने की च...
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