नई दिल्ली, अप्रैल 8 -- हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की अपनी उच्च राशि में होते हैं। दोनों की सम्मिलित कृपा का फल अक्षय हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य कभी व्यर्थ नहीं होते और उनका फल हमेशा बना रहता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी कार्य को ग्रह स्थिति या विशेष शुभ समय देखे बिना किया जा सकता है। पूरा दिन ही शुभ माना जाता है। इसे "अक्षय" कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह जो कभी नष्ट न हो, हमेशा स्थायी रहे। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। यह तिथि भगवान परशुराम के जन्म, गंगा के पृथ्वी पर अवतरण और कृष्ण-सुदामा के मिलन जैसी घटनाओं से भी संबंधित है। ऐसी ही आज हम अक्षय तृतीया...