लखनऊ, मई 10 -- शायरी, हीर-रांझा की कहानी और दास्तानगोई के साथ मशहूर शायर कैफी आजमी को याद किया गया। कैफी आजमी अकादमी की ओर से अकादमी परिसर में रविवार को उनकी 24वीं पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम में सबसे पहले फिल्म 'हीर-रांझा' की झलकियां दिखाई गईं।
कैफी आजमी की रचनात्मकता इस अवसर पर वरिष्ठ रंग निर्देशक सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हीर-रांझा के संवाद कैफी आजमी ने पद्य में लिखे थे, लेकिन ये संवाद पारसी थिएटर जैसे नहीं बल्कि यथार्थवादी अभिनय के लिए अनुकूल थे। प्रो. नलिन रंजन ने कहा कि फिल्म के संवादों में जहां रूमानियत है, वहीं चुटीलापन भी है; उन पर लोकधर्मी नाटकीयता का भी असर है।
कैफी आजमी की विशेषताएँ कानपुर से आए प्रो. खान अहमद फारूख ने कहा कि यह फिल्म उर्दू कविता, पंजाबी लोक परंपरा और आधुनिक सिनेमा का एक अनोखा संगम है। प्रो. अली अहमद फ...
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