हजारीबाग, अगस्त 15 -- हजारीबाग, वरीय संवाददाता यह भी पढ़ें- तिरंगे की आन में दो आतंकियों को मार गिराया, शहादत के बाद मिला शौर्य चक्र 30 साल के उस युवा की वह उम्र सपने देखने की थी। वर्दी पहनकर देश की रक्षा करने का जुनून था। कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी ने भी भविष्य को लेकर कई सपने संजोए होंगे, लेकिन देश की सेवा का संकल्प उनके लिए सबसे ऊपर था। ड्यूटी के दौरान उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जिस बेटे को माता-पिता ने आंखों के सामने बड़ा किया, वह एक दिन तिरंगे में लिपटकर घर लौटा। परिवार के लिए वह पल गर्व और गहरे दुख का था। पूरा हजारीबाग रो पड़ा था। आज भी पिता सरदार अजिन्दर सिंह बख्शी और मां नीलू बख्शी बेटे को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है। वे कहते हैं कि करमजीत ने देश के लिए जान दी, इससे बड़ा गौरव ...