संजय यादव, अगस्त 15 -- Independence day special: पूर्वांचल के रणबांकुरों द्वारा दिखाया आजादी का स्वप्न आज भी लोगों की आंखों में फल-फूल रहा है। एक ओर आज की युवा पीढ़ी इंजीनियर, डॉक्टर, व्यापार या उद्योग का क्षेत्र चुन रही है। वहीं, कुछ युवा गांव की पगडंडी से चलकर भारतीय सीमाओं तक की यात्रा कर रहे हैं। कैप्टन अंशुमान सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने आईआईटी और एनआईटी जैसी संस्थाओं को ठुकराकर सेना की वर्दी चुनी। वर्ष 2023 में सियाचिन ग्लेशियर में अपने पांच साथियों की जान बचाते हुए वे वीरगति को प्राप्त हो गए। सेना में जनरल बनने का अधूरा स्वप्न लिए 26 वर्ष की उम्र में देश पर मर-मिटे इस लाल को मरणोपरांत कीर्तिचक्र से भी नवाजा गया। कैप्टन अंशुमान का जन्म अक्तूबर 1996 में देवरिया जिले की सलेमपुर तहसील के बरडीहा दलपत गांव में हुआ था। उनके प...