मेरठ, मई 12 -- कानूनी शोध में छात्रों को पुस्तकें मुख्य स्रोत के रूप में प्रयोग करनी चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी को मात्र सहायक रूप में ही प्रयोग करना होगा। यह कानूनी शोध का मुख्य स्रोत नहीं हो सकती। सूचना प्रौद्योगिकी के समकालीन विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल कानूनी अनुसंधान में सहायक उपकरण के रूप में ही किया जा सकता है। एआई द्वारा प्रस्तुत डेटा में पूर्वाग्रह होने की वजह से परिणाम गलत हो सकते है। सीसीएसयू कैंपस के विधि अध्ययन संस्थान में शिक्षा प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग के लाभ, हानियां और चुनौतियां विषय पर हुए व्याख्यान में यह बातें पेरू के चर्चित विधि विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता प्रो.जॉर्ज इसहाक टोरस मैनरिक ने कही। प्रो.जार्ज ने कहा कि एआई से प्रशासनिक तंत्र की दक्षता में सुधार कि...