विधि संवाददाता, सितम्बर 22 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि केवल धर्म परिवर्तन से किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति का दर्जा स्वतः समाप्त नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी जनजाति की रीति-रिवाजों, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से पूरी तरह अलग हो जाता है और दूसरी सामाजिक और धार्मिक पहचान अपना लेता है, तो वह कानूनन मिलने वाले एसटी वर्ग के सुरक्षात्मक लाभों का दावा जारी नहीं रख सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने सोनभद्र जिले की नन्हकी उर्फ नैमुन्निशा की तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। याची ने दुद्धी के डिप्टी कलेक्टर के बाद पिछले 22 जनवरी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत उसकी जमीनों के बैनामों को अवैध घोषित कर जमीनों को राज्य सरकार में निहित करने का निर्देश दिया गया था। सोनभद्र निवासी याची ने जन्म से भुईय...