कौशाम्बी, जून 16 -- 'मिनी भुसावल' के रूप में पहचान बना चुके कौशाम्बी में अब केले की खेती से किसानों की आय बढ़ाने का एक और रास्ता तैयार किया जा रहा है। फसल काटने के बाद बेकार समझकर छोड़ दिए जाने वाले केले के तनों से बैग, चटाइयां, रस्सियां, पत्तल, दोना और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की योजना पर उद्यान विभाग काम कर रहा है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा। जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती होती है। बड़ी मात्रा में उत्पादन होने के कारण हर वर्ष हजारों टन केले के तने कृषि अपशिष्ट के रूप में बेकार चले जाते हैं। यह भी पढ़ें- किसान कर सकते हैं मिलेट्स प्रोसेसिंग, खोल सकते हैं मोबाइल आउटलेट विशेषज्ञों के अनुसार केले के तनों से निकलने वाला रेशा काफी मजबूत होता है। इससे पर्यावरण अनुकूल बैग, चटाइयां, रस्सियां, सजावटी वस...