कानपुर, मार्च 2 -- कानपुर देहात। रंगों का पर्व होली आपस में खुशियां बांटने और रिश्तों में हंसी-ठिठोली की मिठास घोलने का त्योहार है। खुशी व मस्ती में सराबोर करने वाली होली में हुड़दंग पर किसी का जोर नहीं चलता है। होली में रंग न हों ऐसा हो नहीं सकता, लेकिन उत्साह व उमंग में सिंथेटिक रंग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालते हैं। ऐसे में इस बार हर्बल रंगों से होली खेलने पर लोगों का अधिक जोर है। डाक्टरों का भी कहना है कि रंग खेलें, लेकिन सावधानी रखना जरूरी है। रंग खेलने में लापरवाही त्योहार की खुशियों को फीका कर सकती है। होली में एक-दूसरे को रंग लगाने का आनंद व उत्साह तथा उमंग में सिंथेटिक रंग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। केमिकल रंग त्वचा, आंख व शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित होते हैं। ऐसे में प्राकृतिक रंगों के साथ होली खेलना अधिक बेहतर...