लखनऊ, अप्रैल 29 -- 1800 करोड़ का बजट, फिर भी ठेके पर हो रही जांच मशीन खरीद से ज्यादा पीपीपी मॉडल पर भरोसा ठेके पर जांच व इलाज व्यवस्था ने बढ़ाई निर्भरता लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। केजीएमयू अफसरों को पीपीपी मॉडल पर इलाज भा रहा है। 1800 करोड़ रुपये का सालाना बजट होने के बावजूद अधिकारी मामूली मशीनें तक लगाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। ठेके पर जांच और इलाज की व्यवस्था बांट रखी है। केजीएमयू प्रशासन की यह नीति मरीजों की जेब काट रही है।

किफायती इलाज का बजट केजीएमयू में मरीजों को किफायती और आधुनिक इलाज मुहैया कराने के लिए सरकार ने लगभग 1800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। ओपीडी पर्चे, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी समेत दूसरे शुल्क से भी केजीएमयू प्रशासन हर साल मोटी कमाई कर रहा है।

यूरोलॉजी की व्यवस्था चरमराई यूरोलॉजी विभाग जांच और इलाज की व्यवस्था चरमरा ...