दिल्ली, अप्रैल 28 -- दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश न होने संबंधी फैसले ने न्यायपालिका की साख और उसके राजनीतिकरण पर एक नई बहस छेड़ दी है.कानूनी जानकार इसे किस तरह देखते हैं?दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आबकारी मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने न तो वो खुद उपस्थित होंगे और न ही उनके वकील दलील पेश करने जाएंगे.अरविंद केजरीवाल ने इस बारे में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को एक पत्र भी लिखा है और सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया है.जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे पत्र में अरविंद केजरीवाल ने कहा है, "इस पत्र को लिखने का मेरा एकमात्र उद्देश्य न्यायपालिका को मजबूत करना है, उसे कमजोर होने से बचाना ...