केंचुए जैविक इंडिकेटर, कम करतें हैं उर्वरक निर्भरता
वाराणसी, जून 3 -- जक्खिनी (वाराणसी), संवाद। काजीचक गांव (आराजी लाइन) में मंगलवार को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर, शहंशाहपुर) ने 'खेत बचाओ अभियान' के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मृदा (मिट्टी) स्वास्थ्य संरक्षण, जैव-उर्वरकों के उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि मिट्टी में केंचुए समेत कई सूक्ष्मजीवी खेतों के जैविक संकेतक (इंडिकेटर) होते हैं। इनकी वजह से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। निदेशक ने किसानों का वैज्ञानिक कृषि तकनीक अपनाने का आह्वान किया। फसल विविधीकरण नीति अपनाने, संतुलित उर्वरक के प्रयोग और खाद्य तेल की मात्रा कम करने पर जोर दिया। यह भी पढ़ें- 30 जून तक चलेगा 'खेत बचाओ अभियान' कृषि वैज्ञानिक ...
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