औरैया, अप्रैल 1 -- रुरुगंज, संवाददाता। क्षेत्र के साहूपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान पंडाल में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं। कथावाचक नरेश चंद्र शुक्ला ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में पद, प्रतिष्ठा और धन का कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने बताया कि किस प्रकार दरिद्र ब्राह्मण सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे। जैसे ही कृष्ण को सुदामा के आने का पता चला, वे राजपाट छोड़कर नंगे पांव दौड़ पड़े और अपने मित्र का स्नेहपूर्वक स्वागत किया।कथावाचक ने उस भावुक क्षण का वर्णन किया जब भगवान कृष्ण ने सुदामा के चरण आंसुओं से धोए और उनकी पोटली से चावल लेकर प्रेमपूर्वक ग्रहण किए।...