दुमका, मार्च 21 -- रामगढ़। रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत बौंड़ीया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता के प्रसंग ने पंडाल में मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम कर दी। प्रसंग की गहराई और सुदामा की दीनता का वर्णन करते हुए कथा व्यास पूज्या दिव्या देवी स्वयं भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए दिव्या देवी ने बताया कि मित्रता में पद, प्रतिष्ठा और धन का कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे एक दरिद्र ब्राह्मण सुदामा, अपनी पत्नी सुशीला के आग्रह पर अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे। जब द्वारपाल ने कृष्ण को बताया कि बाहर कोई सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है, तो प्रभु अपना राजपाठ छोड़कर नंगे पैर दौड़ पड़े। दिव्या देवी ने उस मर्मस्पर्शी क्षण का वर्...