वाराणसी, जून 21 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कोई भी चित्र हम क्यों बना रहे हैं, जब तक कलाकार के मन में यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक वह अपनी कृति के साथ न्याय नहीं कर सकेगा। अपनी कृति को लेकर हर कलाकार को स्पष्ट सोच विकसित करनी ही चाहिए। इसके अभाव में उनकी रचना प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। ये बातें नागरी नाटक मंडली में वरिष्ठ चित्रकार बीएचयू के दृश्य कला संकाय की पूर्व डीन प्रो. मृदुला सिन्हा ने कहीं। वह शनिवार को नागरी नाटक मंडली न्यास एवं अभ्युदय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला 'मुखड़ा-03' के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। यह भी पढ़ें- रंगमंच की सिखाईं बारीकियां उन्होंने कहा कि बनारस एक ऐसी जगह है जो पूरी दुनिया से सृजनकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। विभिन्न विधाओं से जुड़ी बड़ी-बड़ी हस्तियां खामोश...