कोडरमा, जुलाई 7 -- झुमरी तिलैया निज प्रतिनिधि। कृतज्ञता वह दिव्य भावना है जो मनुष्य को विनम्र, संवेदनशील और महान बनाती है। यह केवल धन्यवाद कह देने का नाम नहीं, बल्कि उन उपकारों को जीवन भर स्मरण रखने का संस्कार है, जिनके कारण हमारा जीवन सुगम और सार्थक बनता है।

कृतज्ञता का महत्व जिस व्यक्ति के हृदय में कृतज्ञता का भाव होता है, वह कभी अहंकार का शिकार नहीं होता। उक्त बातें जैन समाज के पंडित अभिषेक शास्त्री ने नया मंदिर में भक्तों को संबोधित करते हुए अपने प्रचन में कहा। उन्होंने कहा कि हम प्रतिदिन न जाने कितने लोगों के ऋणी बनते हैं। माता-पिता हमें जीवन देते हैं, गुरु अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं, किसान अन्न उपजाता है, सैनिक अपने प्राणों की बाजी लगाकर हमारी सुरक्षा करता है और प्रकृति बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के हमें व...