सहरसा, सितम्बर 12 -- सोनवर्षा राज, एक संवाददाता। मिथिला में भाद्रपद मास की अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मिथिला क्षेत्र में इसे कुशी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। शुक्रवार को कुशी अमावस्या के अवसर पर पंडित और यजमानों ने सूर्योदय से पहले विधि-विधान के साथ कुश (दर्भा घास) को धरती से ग्रहण किया। पंडित सुमन झा ने बताया कि इस दिन विधिपूर्वक ग्रहण की गई कुश का उपयोग सालभर श्राद्ध, तर्पण, यज्ञ, हवन, पूजा और अन्य वैदिक अनुष्ठानों में किया जाता है। इस दिन स्नान-दान, जप, तप, व्रत और पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुश सामान्य घास नहीं, बल्कि पवित्र वनस्पति है। यह भी पढ़ें- Darbhanga News: जाले:अचानक गिरा सहजन का पेड़, बाइक क्षतिग्रस्त पूजा-पाठ में कुश से आसन बनाने, पवित्री धारण करने तथा पूज...