धनबाद, नवम्बर 4 -- देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) अब सिर्फ कोयला कंपनी नहीं रहना चाहती। 52वें स्थापना दिवस पर मिले संकेतों से साफ है कि कंपनी तेजी से खुद को एक वैश्विक एनर्जी कंपनी के रूप में स्थापित करने जा रही है। पारंपरिक खनन के दायरे से बाहर निकलकर कंपनी ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अपना कारोबार विविधीकृत करने की बड़ी योजना बनाई है। सबसे बड़ा बदलाव वैश्विक विस्तार में है। कंपनी ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में लिथियम, कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की खदानों को हासिल करने की दौड़ में है। ये मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी निर्माण के लिए बेहद जरूरी हैं। इन विदेशी संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन के लिए कोल इंडिया के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैनात किया जाएगा।...