किशनगंज, अप्रैल 11 -- किशनगंज, वरीय संवाददाता। कुपोषण के खिलाफ संघर्ष, स्वस्थ भविष्य की अनिवार्यता जीवन के प्रारंभिक छह वर्ष किसी भी व्यक्ति के संपूर्ण विकास की नींव होते हैं। यही वह समय होता है जब बच्चे का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है, उसकी शारीरिक वृद्धि आकार लेती है और उसकी सीखने की क्षमता का आधार तैयार होता है। यदि इस महत्वपूर्ण अवधि में उचित पोषण, देखभाल और सकारात्मक वातावरण नहीं मिलता, तो इसका प्रभाव जीवन भर बना रहता है। भारत जैसे विकासशील देश में कुपोषण आज भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जो न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता, शिक्षा और भविष्य की उत्पादकता को भी सीमित कर देता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पोषण अभियान को जनआंदोलन के रूप में संचालित किया जा रहा है।...
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