गिरडीह, जून 19 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। कहते हैं कानून अंधा होता है, लेकिन कुदरत का कानून कभी अंधा नहीं हो सकता। संसार के कानूनों में त्रुटियां हो सकती है, उससे बचने का उपाय मिल सकता है किन्तु प्रकृति और कर्म का विधान अत्यंत सूक्ष्म, निष्पक्ष तथा अचूक होता है। वहां किसी प्रकार का पक्षपात, छल अथवा बचाव संभव नहीं है। उक्त बातें मधुबन में साधनारत पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज गुणायतन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य अपनी चतुराई, धन, प्रभाव या अन्य साधनों के बल पर कभी-कभी सांसारिक न्याय व्यवस्था को भ्रमित कर सकता है, कानून की आंखों में धूल झोंक सकता है, किन्तु कुदरत की आंखों में धूल झोंकना किसी के लिए भी संभव नहीं है। कर्मों का लेखा-जोखा अत्यंत सूक्ष्मता से संचालित होता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपन...