फर्रुखाबाद कन्नौज, सितम्बर 27 -- फर्रुखाबाद। ​जानवर के काटने या खरोंचने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग तत्काल अस्पताल जाने के बजाय घरेलू नुस्खों पर भरोसा कर रहे हैं। घाव पर हल्दी, मिर्च, मिट्टी, सिंदूर या पौधों का रस लगाने की परंपरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ये घरेलू उपाय रेबीज वायरस को रोकने में बिल्कुल सक्षम नहीं हैं, बल्कि इसके उलट घाव पर जलन पैदा करने वाले पदार्थ लगाने से त्वचा और घाव को भारी नुकसान हो सकता है। विश्व रेबीज दिवस से एक दिन पहले जिले में सामने आए स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी कुत्ते और बंदर के काटने की बड़ी संख्या की ओर इशारा कर रहे हैं। ​स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार केवल जून, जुलाई और अगस्त के तीन महीनों में जिले में 15,103 लोगों को कुत्ते ने काटा। इन तीन महीनों में कुल 8,473 एंटी-रेबीज...