नई दिल्ली, अप्रैल 6 -- शनि देव कर्मों के फलदाता माने जाते हैं। जब कुंडली में शनि भारी होता है या साढ़ेसाती, ढैया, महादशा-अंतर्दशा चल रही होती है, तब व्यक्ति के जीवन में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर अनेक कष्ट आते हैं। ऐसे समय में संकट मोचन हनुमान स्तोत्र का नियमित पाठ करना अत्यंत प्रभावशाली और शुभ माना जाता है। हनुमान जी को रुद्रावतार कहा जाता है और शनिदेव ने स्वयं हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे। संकट मोचन हनुमान स्तोत्र को हनुमानाष्टक भी कहते हैं। इस स्तोत्र के पाठ से शनि का प्रकोप शांत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।शनि दोष और साढ़ेसाती में क्यों जरूरी है हनुमान स्तोत्र? शनि की साढ़ेसाती या ढैया के दौरान व्यक्ति को अकारण तनाव, स्वास्थ्य समस्या, आर्थिक हानि, नौकरी में अड़चन औ...