भदोही, सितम्बर 2 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। धान फसल में कीट लगने का खतरा बढ़ने लगा है। ऐसे में उचित इंतजाम कर किसान धान फसल को बीमारी व कीट की चपेट में आने से बचा सकती हैं। कीट की सूंडी पत्तियों के दोनेां किनारों को एक साथ चिपका देती हैं और अंदर ही अंदर पत्तियों को खा जाती हैं।

कीटों की पहचान इसी प्रकार धान में लगने वाला हिस्पा कीट भी पतियों में कई जगह छेद करते हुए पत्तियों को खा जाता है। इन दोनों कीटों को नियंत्रण के लिए क्लोरोपाइरीफास नामक कीटनाशक 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने बताया कि आगामी दिनों में भूरा हापर के प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। यह कीट पौधों तना तथा पत्तियों से रस चूसता है जिससे पौधे झुलस जाते हैं। इस कीट के नियंत्रण के लिए रात में खेत के ब...