नई दिल्ली, नवम्बर 7 -- किसी महिला को गलत नजर से देखना यौन संबंध बनाने की मांग करना नहीं माना जा सकता। कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की और यौन उत्पीड़न व आपराधिक धमकी के आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। जस्टिस सूरज गोविंदराज ने कहा कि सिर्फ गलत तरीके से देखने के आरोप को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1)(ii) के तहत यौन संबंध बनाने की मांग या अनुरोध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह फैसला 2 नवंबर को हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुनाया। यह भी पढ़ें- क्या अरुणाचल प्रदेश में 50 किमी अंदर घुस आए चीनी सैनिक? सेना ने खुद बताई सच्चाई यह मामला एक महिला की शिकायत से जुड़ा था। उसने शुरुआत में आरोप लगाया था कि पैसों के विवाद को सुलझाने के लिए जब वह आरोपी के घर गई तो उसने उस...