औरैया, सितम्बर 4 -- शिक्षक केवल किताबों का पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और समाज को दिशा देने वाला भी होता है। जिले के सरकारी विद्यालयों में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी को स्कूल की घंटी और कक्षा तक सीमित नहीं रखा। किसी ने अपने प्रयासों से विद्यालय को हरियाली और गौरैया की चहचहाहट से भर दिया तो किसी ने सेवानिवृत्ति के बाद भी बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा। कोई गरीब बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है तो किसी के प्रयास से सरकारी विद्यालय का कायाकल्प हुआ और नामांकन बढ़ा। शिक्षक दिवस पर ऐसे शिक्षकों के प्रयास दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं। दो नीम से शुरू किया सफर, अब फूलों के बीच चहचहाती हैं सैकड़ों गौरैया

शिक्षा के लिए प्रकृति से जुड़ाव वर्ष 2015 में नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने विद्यालय की जिम्मेदारी संभाली तो परिसर में सिर्फ द...